अथर्ववेद (कांड 10)
यत्रा॒मृतं॑ च मृ॒त्युश्च॒ पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ते । स॑मु॒द्रो यस्य॑ ना॒ड्यः पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१५)
जिस आदि पुरुष में अमृत और मृत्यु स्थित हैं तथा सागर जिस आदि पुरुष की नाड़ियों में समाया हुआ है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१५)
Tell me about the God in whom nectar and death are located and the ocean is contained in the veins of the first man, who is He? (15)