हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.7.25

कांड 10 → सूक्त 7 → मंत्र 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
बृ॒हन्तो॒ नाम॒ ते दे॒वा येऽस॑तः॒ परि॑ जज्ञि॒रे । एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्यास॑दाहुः प॒रो जनाः॑ ॥ (२५)
वे बृहत्‌ नाम के देव हैं, जो असत्‌ अर्थात्‌ प्रकृति से उत्पन्न हुए हैं. लोक उन्हें श्रेष्ठ कहता है. (२५)
He is the god of the great name, who is born from asat i.e. nature. People call them superior. (25)