अथर्ववेद (कांड 10)
यत्र॑ स्क॒म्भः प्र॑ज॒नय॑न्पुरा॒णं व्यव॑र्तयत् । एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्य॑ पुरा॒णम॑नु॒संवि॑दुः ॥ (२६)
जहां परमात्मा पुराण पुरुष को उत्पन्न करता हुआ विस्तृत करता है, उस परमात्मा के एक अंग को ज्ञानी जन पुराण के नाम से ही जानते हैं. (२६)
Where The Buddha expands the creation of a man, one part of that God is known only by the name of the Knowledgeable Jan Purana. (26)