हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.7.32

कांड 10 → सूक्त 7 → मंत्र 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
यस्य॒ भूमिः॑ प्र॒मान्तरि॑क्षमु॒तोदर॑म् । दिवं॒ यश्च॒क्रे मू॒र्धानं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑ ॥ (३२)
धरती जिस के पैरों का नाम है, अंतरिक्ष जिस का उदर है तथा जिस ने स्वर्ग को अपना शीश बनाया है, उस ज्येष्ठ ब्रह्म को मेरा नमस्कार है. (३२)
I salute the first Brahman, whose feet are the earth, whose stomach is space and who has made heaven his head. (32)