अथर्ववेद (कांड 10)
प्र॒जाप॑तिश्चरति॒ गर्भे॑ अ॒न्तरदृ॑श्यमानो बहु॒धा वि जा॑यते । अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क॑त॒मः स के॒तुः ॥ (१३)
प्रजापति दिखाई न देता हुआ गर्भ में संचरण करता है तथा अनेक रूपों में जन्म लेता है. उस के आधे भाग से सारा विश्व उत्पन्न हुआ है. उस का शेष भाग श्रद्धा है, वही उस की पहचान है. (१३)
Prajapati transmits in the womb without being visible and is born in many forms. Half of that has created the whole world. The rest of his is faith, that is his identity. (13)