हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.8.41

कांड 10 → सूक्त 8 → मंत्र 41 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
उत्त॑रेणेव गाय॒त्रीम॒मृतेऽधि॒ वि च॑क्रमे । साम्ना॒ ये साम॑ संवि॒दुर॒जस्तद्द॑दृशे॒ क्व ॥ (४१)
जो साम मंत्रों के द्वारा परमात्मा को जानने वाले हैं, उन्होंने अंत में गायत्री रूप अमृत में प्रवेश किया. वह अजन्मा कहां दिखाई दिया था अर्थात्‌ कहीं नहीं. (४१)
Those who know God through sama mantras finally entered the nectar of Gayatri form. Where did that unborn appear i.e. nowhere. (41)