अथर्ववेद (कांड 10)
यत्ते॑ क्लो॒मा यद्धृद॑यं पुरी॒तत्स॒हक॑ण्ठिका । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१५)
हे शतौदना गौ! तेरा क्लोम, हृदय, मलाशय और गला तेरे दानदाता को सदा दही, मधुर दूध और घी देते रहें. (१५)
O Shataudana Gau! May your branch, heart, rectum and throat always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (15)