अथर्ववेद (कांड 10)
यत्ते॒ पुच्छं॒ ये ते॒ बाला॒ यदूधो॒ ये च॑ ते॒ स्तनाः॑ । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (२२)
हे शतौदना गौ! तेरी जो पूंछ, तेरे जो बाल, तेरा जो ऐन एवं जो थन हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२२)
O Shataudana Gau! May your tail, your hair, your ann and your udder always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (22)