हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.9.23

कांड 10 → सूक्त 9 → मंत्र 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
यास्ते॒ जङ्घा॒ याः कुष्ठि॑का ऋ॒च्छरा॒ ये च॑ ते श॒फाः । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (२३)
हे शतौदना गौ! तेरी जो जंघाएं, जो घुटने, कूल्हे और खुर हैं, वे सदा तेरे दानदाता को दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२३)
O Shataudana Gau! May your thighs, knees, hips and hoofs always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (23)