हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.1.24

कांड 11 → सूक्त 1 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
अदि॑ते॒र्हस्तां॒ स्रुच॑मे॒तां द्वि॒तीयां॑ सप्तऋ॒षयो॑ भूत॒कृतो॒ यामकृ॑ण्वन् । सा गात्रा॑णि वि॒दुष्यो॑द॒नस्य॒ दर्वि॒र्वेद्या॒मध्ये॑नं चिनोतु ॥ (२४)
प्राणियों की सृष्टि करने वाले सप्त ऋषियों ने देव माता अदिति के द्वितीय हाथ के रूप में होम के साधन इस करछुली को बनाया था. यह करछुली पके हुए भात के शरीरों को जानती हुई वेदी के ऊपर इस भात को स्थापित करे. (२४)
The Sapta Rishis, who created the creatures, made this voluntary instrument as the second hand of Dev Mata Aditi. This ladle should install this rice on the altar knowing the bodies of the ripe rice. (24)