हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.10

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
ये त आस॒न्दश॑ जा॒ता दे॒वा दे॒वेभ्यः॑ पु॒रा । पु॒त्रेभ्यो॑ लो॒कं द॒त्त्वा कस्मिं॒स्ते लो॒क आ॑सते ॥ (१०)
प्राचीन काल में देवों से जो दस देव उत्पन्न हुए, वे अपने पुत्रों को यह लोक दे कर भी स्वयं किस लोक में निवास करते हैं? (१०)
In ancient times, the ten gods who were born to the gods, they themselves reside in which world even after giving this world to their sons? (10)