हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.9

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
इन्द्रा॒दिन्द्रः॒ सोमा॒त्सोमो॑ अ॒ग्नेर॒ग्निर॑जायत । त्वष्टा॑ ह जज्ञे॒ त्वष्टु॑र्धा॒तुर्धा॒ताजा॑यत ॥ (९)
पूर्व काल में जो इंद्र थे, उन से इन वर्तमान काल के इंद्र की उत्पत्ति हुई. इसी सोम से सोम, अग्नि से अग्नि, त्वष्टा से त्वष्टा और धाता से धाता उत्पन्न हुए. (९)
Indra of this present period originated from the Indra who was in the former period. From this Soma, Soma, Agni from Agni, Tvashta from Tvashta and Dhata from Dhata were born. (9)