हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.10.34

कांड 11 → सूक्त 10 → मंत्र 34 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
अ॒प्सु स्ती॒मासु॑ वृ॒द्धासु॒ शरी॑रमन्त॒रा हि॒तम् । तस्मि॒ञ्छवोऽध्य॑न्त॒रा तस्मा॒च्छवोऽध्यु॑च्यते ॥ (३४)
संसार को गीला करने वाले एवं बढ़े हुए उन जलों के मध्य शरीर स्थित है. उस ब्रह्मांड शरीर के ऊपर, नीचे और मध्य में वह आत्मा कहा जाता है. (३४)
The body lies between those waters that wet the world and enlarge. That universe is called the soul above, below and in the middle of the body. (34)