हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.11.19

कांड 11 → सूक्त 11 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
प्रब्ली॑नो मृदि॒तः श॑यां ह॒तोऽमित्रो॑ न्यर्बुदे । अ॑ग्निजि॒ह्वा धू॑मशि॒खा जय॑न्तीर्यन्तु॒ सेन॑या ॥ (१९)
हे न्यर्बुदि नाम के सर्प! हमारे शत्रु तुम्हारे द्वारा काटे जाने पर प्राण हीन हो कर सोऐं. तुम्हारे द्वारा माया के बल से उत्पन्न की गई अग्नि की ज्वालाएं और धुएं की शिखाएं हमारे शन्रुओं की सेना को पराजित करती हुई हमारे साथ चलें. (१९)
O serpent named Nyarbudi! Let our enemies sleep lifeless when they are bitten by you. Let the flames of agni and the crests of smoke created by you by the force of Maya go with us, defeating the army of our shanrus. (19)