हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.11.24

कांड 11 → सूक्त 11 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
वन॒स्पती॑न्वानस्प॒त्यानोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ । ग॑न्धर्वाप्स॒रसः॑ स॒र्पान्दे॒वान्पु॑ण्यज॒नान्पि॒तॄन् । सर्वां॒स्ताँ अ॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्र द॑र्शय ॥ (२४)
हे अर्बुदि नाम के सर्प! तुम हमारे शत्रुओं को अपनी माया से वृक्षों, वृक्षों के विकारों, गेहूं, जौ आदि फसलों, वन के वृक्षों गंधर्वो और अप्सराओं को दिखाओ. तुम उन्हें उल्कापात आदि अद्भुत अपशकुन दिखाओ. (२४)
O serpent named Arbudi! Show our enemies with your love to trees, diseases of trees, wheat, barley, crops, forest trees, gandharvas and nymphs. You show them amazing awestrucks etc. (24)