हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.12.12

कांड 11 → सूक्त 12 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 12
सर्वां॑ल्लो॒कान्त्सम॑जयन्दे॒वा आहु॑त्या॒नया॑ । बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सो वज्रं॒ यमसि॑ञ्चतासुर॒क्षय॑णं व॒धम् ॥ (१२)
अंगिरा ऋषि के पुत्र एवं देवों के मंत्री बृहस्पति ने तथा इंद्र आदि देवों ने इस आहुति के द्वारा असुरों को मार कर सभी लोकों को प्राप्त किया है. बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने के साधन उस वज्र को इस आहुति के द्वारा ही बनाया है. (१२)
Jupiter, son of Sage Angira and minister of devas, and Gods like Indra etc. have killed the asuras through this sacrifice and attained all the worlds. Jupiter has made that vajra the means of destroying the asuras through this sacrifice. (12)