अथर्ववेद (कांड 11)
ई॒शां वो॑ वेद॒ राज्यं॒ त्रिष॑न्धे अरु॒णैः के॒तुभिः॑ स॒ह । ये अ॒न्तरि॑क्षे॒ ये दि॒वि पृ॑थि॒व्यां ये च॑ मान॒वाः । त्रिष॑न्धे॒स्ते चेत॑सि दु॒र्णामा॑न॒ उपा॑सताम् ॥ (२)
हे शत्रुओ! वज्र के अभिमानी देव त्रिषंधि तुम्हारा राज्य छीन कर अपने अधिकार में करें. हे वज्रात्मक देव! तुम्हारे जो लाल झंडे आकाश में उत्पात के रूप में उत्पन्न होते हैं तथा भूलोक में मनुष्य संबंधी हैं, तुम उन के साथ आओ. (२)
O enemies! Trishandhi, the arrogant god of Vajra, take away your kingdom and take possession of it. O wonderful God! Come with your red flags that arise as mischief in the sky and belong to humans in the earth. (2)