अथर्ववेद (कांड 11)
यश्च॑ कव॒ची यश्चा॑कव॒चो॒मित्रो॒ यश्चाज्म॑नि । ज्या॑पा॒शैः क॑वचपा॒शैरज्म॑ना॒भिह॑तः शयाम् ॥ (२२)
हमारा जो शत्रु कवच धारण किए है अथवा जो कवच रहित है, हमारे जो शत्रु रथ में बैठे हैं, वे अपनेअपने पाशों से बंधे हुए सो जाएं. (२२)
Our enemies who are wearing armor or who are without armor, our enemies who are sitting in the chariot, they should sleep tied to their loops. (22)