हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.12.5

कांड 11 → सूक्त 12 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 12
उत्ति॑ष्ठ॒ त्वं दे॑वज॒नार्बु॑दे॒ सेन॑या स॒ह । अ॒यं ब॒लिर्व॒ आहु॑त॒स्त्रिष॑न्धे॒राहु॑तिः प्रि॒या ॥ (५)
हे देव जाति के अर्बुदि नाम के सर्प! तुम अपनी सेना के साथ उठो. हमारा यह बलि कार्य तुम्हारी तृप्ति करने वाला हो. त्रिषंधि देव की जो सेना है, वह भी बलि प्राप्त होने के कारण शत्रुओं का विनाश करे. (५)
O serpent named Arbudi of the god race! You get up with your army. May this sacrificial act of ours satisfy you. The army of Trishandhi Dev should also destroy the enemies due to the sacrifice. (5)