हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.2.29

कांड 11 → सूक्त 2 → मंत्र 29 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नो॑ अर्भ॒कं मा नो॒ वह॑न्तमु॒त मा नो॑ वक्ष्य॒तः । मा नो॑ हिंसीः पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च॒ स्वां त॒न्वं रुद्र॒ मा री॑रिषो नः ॥ (२९)
हे रुद्र! हमारे संबंधी वृद्ध की हिंसा मत करो. हमारे शिशु की तथा भार वहन के योग्य युवक की हिंसा मत करो. भार ढोने वाले सेवकों की भी हिंसा मत करो. हे रुद्र! हमारे मातापिता की तथा हमारे अपने शरीर की भी हिंसा मत करो. (२९)
O Rudra! Don't do the violence of our relative old. Don't do violence against our baby and the young man who is able to bear the load. Do not violence even the servants who carry the load. O Rudra! Don't do violence to our parents and our own bodies. (29)