अथर्ववेद (कांड 11)
रु॒द्रस्यै॑लबका॒रेभ्यो॑ऽसंसूक्तगि॒लेभ्यः॑ । इ॒दं म॒हास्ये॑भ्यः॒ श्वभ्यो॑ अकरं॒ नमः॑ ॥ (३०)
मैं रुद्र को प्रेरणा देने वाले कर्म करने वालों को नमस्कार करता हूं. मैं अशोभन वचन बोलने वाले रुद्र गणों को तथा शिकार के सहायक विशाल मुख वाले कुत्तों को नमस्कार करता हूं. (३०)
I salute those who do the deeds that inspire Rudra. I salute the Rudra Ganas who speak indecent words and the dogs with huge faces that help the hunting. (30)