हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.7.18

कांड 11 → सूक्त 7 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
ब्र॑ह्म॒चर्ये॑ण क॒न्या॒ युवा॑नं विन्दते॒ पति॑म् । अ॑न॒ड्वान्ब्र॑ह्म॒चर्ये॒णाश्वो॑ घा॒सं जि॑गीर्षति ॥ (१८)
ब्रह्मचर्य के द्वारा कन्या युवा पति को प्राप्त करती है. ब्रह्मचर्य के द्वारा बैल और घोड़ा घास खाने की इच्छा करता है. (१८)
Through celibacy, the girl attains a young husband. Through celibacy, the bull and horse desire to eat grass. (18)