हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.7.22

कांड 11 → सूक्त 7 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
पृथ॒क्सर्वे॑ प्राजाप॒त्याः प्रा॒णाना॒त्मसु॑ बिभ्रति । तान्त्सर्वा॒न्ब्रह्म॑ रक्षति ब्रह्मचा॒रिण्याभृ॑तम् ॥ (२२)
प्रजापति के द्वारा उत्पन्न देव, मनुष्य आदि सभी अपने शरीरों में प्राणों को धारण करते हैं. उन सभी की रक्षा आचार्य के द्वारा ब्रह्मचारी में धारण किया हुआ अर्थात्‌ पढ़ाया हुआ वेद करता है. (२२)
Gods, human beings, etc. produced by Prajapati all wear pranas in their bodies. All of them are protected by the Acharya in Brahmachari, that is, the Vedas taught. (22)