अथर्ववेद (कांड 11)
पार्थि॑वा दि॒व्याः प॒शव॑ आर॒ण्या ग्रा॒म्याश्च॒ ये । अ॑प॒क्षाः प॒क्षिण॑श्च॒ ये ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑ ॥ (२१)
पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य, देव, जंगली और ग्रामीण पशु, बिना पंखों के और पंखों वाले प्राणी सभी ब्रह्मचर्य से उत्पन्न हुए. (२१)
Humans living on earth, gods, wild and rural animals, creatures without wings and with wings all originated from celibacy. (21)