हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.7.24

कांड 11 → सूक्त 7 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
ब्र॑ह्मचा॒री ब्रह्म॒ भ्राज॑द्बिभर्ति॒ तस्मि॑न्दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ स॒मोताः॑ । प्रा॑णापा॒नौ ज॒नय॒न्नाद्व्या॒नं वाचं॒ मनो॒ हृद॑यं॒ ब्रह्म॑ मे॒धाम् ॥ (२४)
ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला पुरुष दीप्ति वाले वेदरूपी ब्रह्म को धारण करता है. उस वेद से सभी देव संबंधित हैं. देवों का निवास बना हुआ ब्रह्मचारी प्राण और अपान के बाद ज्ञान को, मन, वाणी, हृदय और मेधा को उत्पन्न करता है. (२४)
A man who follows celibacy wears the radiant Vedari Brahman. All the gods are related to that Veda. Brahmachari, the abode of gods, produces life and knowledge, mind, speech, heart and intelligence after apana. (24)