हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.9.10

कांड 11 → सूक्त 9 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
ए॑करा॒त्रो द्वि॑रा॒त्रः स॑द्यः॒क्रीः प्र॒क्रीरु॒क्थ्यः । ओतं॒ निहि॑त॒मुच्छि॑ष्टे य॒ज्ञस्या॒णूनि॑ वि॒द्यया॑ ॥ (१०)
एक रात्रि वाला सोमयाग, दो रात्रियों तक चलने वाला सोमयाग, एक दिन में होने वाले क्री और प्रक्री नाम के सोमयाग, उक्थों वाला सोमयाग, यज्ञ से संबंधित सूक्ष्म रूप, भावना के साथ यज्ञ शेष अर्थात्‌ यज्ञ के पश्चात बचे हुए भातरूपी ब्रह्म में स्थित है. (१०)
One night Somyag, two nights long Somayag, One Day Kree and Prakri name Somyag, Ukthon Somyag, subtle form related to Yajna, Yajna with emotion is located in shesh i.e. bhatrupi Brahma left after yajna. (10)