हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.1.53

कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 53 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
द्यौश्च॑ म इ॒दं पृ॑थि॒वी चा॒न्तरि॑क्षं च मे॒ व्यचः॑ । अ॒ग्निः सूर्य॒ आपो॑ मे॒धां विश्वे॑ दे॒वाश्च॒ सं द॑दुः ॥ (५३)
आकाश, पृथ्वी, अंतरिक्ष, अग्नि, सूर्य, जल, मेघ तथा सब देवताओं ने मुझे चलने की शक्ति प्रदान की है. (५३)
The sky, earth, space, agni, sun, water, cloud and all the gods have given me the strength to walk. (53)