हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.1.60

कांड 12 → सूक्त 1 → मंत्र 60 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
याम॒न्वैच्छ॑द्ध॒विषा॑ वि॒श्वक॑र्मा॒न्तर॑र्ण॒वे रज॑सि॒ प्रवि॑ष्टाम् । भु॑जि॒ष्यं पात्रं॒ निहि॑तं॒ गुहा॒ यदा॒विर्भोगे॑ अभवन्मातृ॒मद्भ्यः॑ ॥ (६०)
विश्वकर्मा ने हवि द्वारा पृथ्वी को राक्षसों के चक्कर से निकालने की इच्छा की थी. तब गुप्त रहने वाला भुजिष्य पात्र अर्थात्‌ अन्न उपभोग के सामान दिखाई पड़ने लगा. (६०)
Vishwakarma had wished to remove the earth from the circle of demons by Havi. Then the secret bhujishya patra i.e. food consumption items began to appear. (60)