अथर्ववेद (कांड 12)
छि॒न्ध्या च्छि॑न्धि॒ प्र च्छि॒न्ध्यपि॑ क्षापय क्षा॒पय॑ ॥ (५)
हे ब्राह्मण की गाय! तू इस चुराने वाले का छेदन कर और उसे नष्ट कर डाल. (५)
O Brahmin's cow! You pierce this stealer and destroy him. (5)
कांड 12 → सूक्त 10 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation