हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.11.5

कांड 12 → सूक्त 11 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ती॒क्ष्णेन॑ क्षु॒रभृ॑ष्टिना ॥ (५)
हे अघ्न्या! तू सौ पैरों वाले एवं तेज धार वाले वञ्ज से अपने अपहरणकर्ता का वध कर. (५)
Hey Aghnya! You kill your abductor with a hundred-legged and sharp-edged bow. (5)