हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.2.2

कांड 12 → सूक्त 2 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
अ॑घशंसदुःशं॒साभ्यां॑ क॒रेणा॑नुक॒रेण॑ च । यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॒ तेने॒तो मृ॒त्युं च॒ निर॑जामसि ॥ (२)
पाप और दुर्भावनाओं का नाश करने वाले कर तथा अनुकर से मैं यक्ष्मा रोग को पृथकू करता हूं. मैं मृत्यु को भी दूर भगाता हूं. (२)
I separate tuberculosis from the tax and compassion that destroys sin and ill-will. I also drive away death. (2)