अथर्ववेद (कांड 12)
आ रो॑ह॒तायु॑र्ज॒रसं॑ वृणा॒ना अ॑नुपू॒र्वं यत॑माना॒ यति॒ स्थ । तान्व॒स्त्वष्टा॑ सु॒जनि॑मा स॒जोषाः॒ सर्व॒मायु॑र्नयतु॒ जीव॑नाय ॥ (२४)
हे मनुष्यो! तुम वृद्धावस्था की दीर्घ आयु को प्राप्त करो. तुम सुंदर जन्म वाले और मान प्रीति वाले हो. त्वष्टा तुम्हें दीर्घ जीवन के हेतु पूर्ण आयु प्रदान करें. (२४)
O men! You attain the longevity of old age. You are born beautiful and respectful. May tvashta give you full life for a long life. (24)