अथर्ववेद (कांड 12)
अग्ने॑ अक्रव्या॒न्निः क्र॒व्यादं॑ नु॒दा दे॑व॒यज॑नं वह ॥ (४२)
हे गार्हपत्य अग्नि! तुम क्रव्याद अग्नि को हम से दूर करो तथा देव पूजन की सामग्री को वहन करो. (४२)
O agni! You remove the agni from us and bear the material of worshiping God. (42)