हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.3.17

कांड 12 → सूक्त 3 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
स्व॒र्गं लो॒कम॒भि नो॑ नयासि॒ सं जा॒यया॑ स॒ह पु॒त्रैः स्या॑म । गृ॒ह्णामि॒ हस्त॒मनु॒ मैत्वत्र॒ मा न॑स्तारी॒न्निरृ॑ति॒र्मो अरा॑तिः ॥ (१७)
हे ओदन! तू हमें स्वर्ग में लिए जा रहा है. वहां हम स्त्रीपुरुषों सहित प्रकट हों. पाप देवता निर्त्रति और शत्रु वहां हम को अपने वश में न करें इसलिए तू अनुगमन कर. मैं तेरे हाथ को पकड़ रहा हूं. (१७)
O O O O Son! You are taking us to heaven. Let us appear there with men and women. Sin gods disinhibition and enemies should not subdue us there, so follow us. I'm holding your hand. (17)