अथर्ववेद (कांड 12)
वि॒श्वव्य॑चा घृ॒तपृ॑ष्ठो भवि॒ष्यन्त्सयो॑निर्लो॒कमुप॑ याह्ये॒तम् । व॒र्षवृ॑द्ध॒मुप॑ यच्छ॒ शूर्पं॒ तुषं॑ प॒लावा॒नप॒ तद्वि॑नक्तु ॥ (१९)
हे ओदन! तू घृतपृष्ठ अर्थात् घी की पीठ वाला हो कर मत आ. तू परलोक में हमारे साथ प्रकट होने के लिए हमारे पास आ और वर्षा ऋतु में प्रवृद्ध उपकरण वाले रूप को प्राप्त हो. वह तुझ से भूसी को अलग करे. (१९)
O O O O Son! Do not come to us with a ghritpeda i.e. the back of ghee. Come to us to appear with us in the hereafter and in the rainy season you will get the form of an old tool. He should separate the husk from you. (19)