अथर्ववेद (कांड 12)
वन॑स्पते स्ती॒र्णमा सी॑द ब॒र्हिर॑ग्निष्टो॒मैः संमि॑तो दे॒वता॑भिः । त्वष्ट्रे॑व रू॒पं सुकृ॑तं॒ स्वधि॑त्यै॒ना ए॒हाः परि॒ पात्रे॑ ददृश्राम् ॥ (३३)
हे वनस्पति! कुशा बिछा दी है. तुम उस पर बैठो. देवताओं ने तुम्हें अग्नि सोम के समान समझा है. स्वथिति ने उसे त्वष्टा के समान शोभन रूप दिया है. वह अब पात्रों में दिखाई देता है. (३३)
O vegetation! Kusha has laid. You sit on it. The gods have treated you as Agni Soma. Swathiti has given her a beautiful look like Tvashta. He now appears in the characters. (33)