हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.3.40

कांड 12 → सूक्त 3 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
याव॑न्तो अ॒स्याः पृ॑थि॒वीं सच॑न्ते अ॒स्मत्पु॒त्राः परि॒ ये सं॑बभू॒वुः । सर्वां॒स्ताँ उप॒ पात्रे॑ ह्वयेथां॒ नाभिं॑ जाना॒नाः शिश॑वः स॒माया॑न् ॥ (४०)
हे यजमान! तुम अपनी पत्नी और सब पुत्रों को इस पात्र के पास बुलाओ. वे बालक अपनी नाभि (केंद्र) को जानते हुए यहां आएं. (४०)
O host! You call your wife and all the sons to this vessel. Those children should come here knowing their navel (center). (40)