अथर्ववेद (कांड 12)
अ॒ग्नी रक्ष॑स्तपतु॒ यद्विदे॑वं क्र॒व्यात्पि॑शा॒च इ॒ह मा प्र पा॑स्त । नु॒दाम॑ एन॒मप॑ रुध्मो अ॒स्मदा॑दि॒त्या ए॑न॒मङ्गि॑रसः सचन्ताम् ॥ (४३)
जो राक्षस मेरे कर्म फल में बाधा पहुंचाते हैं. ये अग्नि देव उन्हें बाधित करें अर्थात् रोके. क्रव्याद और पिशाच हमारा शोषण न करें. इस राक्षस को यहां आने से रोकते हुए हम भागते हैं. आंगिरस और सूर्य इस राक्षस को वश में करें. (४३)
The demons who obstruct my karma fruit. May this agni god interrupt them, that is, stop them. Don't let kravyad and vampires exploit us. We run away, preventing this monster from coming here. Control this monster, Angirus and the Sun. (43)