अथर्ववेद (कांड 12)
व॒र्षं व॑नु॒ष्वापि॑ गच्छ दे॒वांस्त्व॒चो धू॒मं पर्युत्पा॑तयासि । वि॒श्वव्य॑चा घृ॒तपृ॑ष्ठो भवि॒ष्यन्त्सयो॑निर्लो॒कमुप॑ याह्ये॒तम् ॥ (५३)
हे ओदन! तू फल की वर्षा करने वाला हो. तू देवताओं के पास जा कर अपनी त्वचा को धुएं के समान उछालना. तू घृत पृष्ठ होता हुआ अनेक प्रकार से पूजित हो कर तथा समान उत्पत्ति वाला बन कर इस पुरुष को स्वर्ग में प्राप्त हो. (५३)
O O O O Son! You are going to rain fruit. You go to the gods and throw your skin like smoke. You are worshiped in many ways and become of equal origin and this man should get this man in heaven. (53)