अथर्ववेद (कांड 12)
यथा॑ शेव॒धिर्निहि॑तो ब्राह्म॒णानां॒ तथा॑ व॒शा । तामे॒तद॒च्छाय॑न्ति॒ यस्मि॒न्कस्मिं॑श्च॒ जाय॑ते ॥ (१४)
वशा गाय ब्राह्मणों की धरोहर के समान होती है. यह गाय वास्तव में ब्राह्मणों की ही है. वह चाहे जिस के घर में प्रकट हो जाए, ये ब्राह्मण गोस्वामी के सामने आ कर इस गाय को मांगते हैं. (१४)
Vasha cow is like the heritage of Brahmins. This cow actually belongs to Brahmins. No matter whose house he appears in, these Brahmins come in front of Goswami and ask for this cow. (14)