हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.4.15

कांड 12 → सूक्त 4 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
स्वमे॒तद॑च्छायन्ति॒ यद्व॒शां ब्रा॑ह्म॒णा अ॒भि । यथै॑नान॒न्यस्मि॑ञ्जिनी॒यादे॒वास्या॑ नि॒रोध॑नम् ॥ (१५)
वशा गाय के सामने आने वाले ब्राह्मण अपने ही धन के समान उस के पास जाते हैं. इन्हें वर्जित करना अर्थात्‌ इन्हें रोकना गाय के स्वामी को हानि पहुंचाता है. (१५)
Brahmins who come in front of the Vasha cow go to it like their own money. Prohibiting them means stopping them harms the owner of the cow. (15)