हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.4.23

कांड 12 → सूक्त 4 → मंत्र 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
य ए॒वं वि॒दुषे॑ऽद॒त्त्वाथा॒न्येभ्यो॒ दद॑द्व॒शाम् । दु॒र्गा तस्मा॑ अधि॒ष्ठाने॑ पृथि॒वी स॒हदे॑वता ॥ (२३)
जो पुरुष विद्वान्‌ को गौ न देता हुआ, अन्य ब्राह्मण को देता है, उस के लिए पृथ्वी देवताओं सहित दुर्गम हो जाती है. (२३)
For the man who does not give cow to the scholar, gives it to another Brahmin, the earth becomes inaccessible along with the gods. (23)