हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.4.48

कांड 12 → सूक्त 4 → मंत्र 48 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
ए॒तद्वो॑ ब्राह्मणा ह॒विरिति॑ मन्वीत याचि॒तः । व॒शां चेदे॑नं॒ याचे॑यु॒र्या भी॒माद॑दुषो गृ॒हे ॥ (४८)
दान करने वाले के घर में यदि भीमा वशा है तो उस वशा की याचना करने पर यह कहे कि हे ब्राह्मणो! यह तुम्हारे लिए हवि है. (४८)
If there is Bhima Vasha in the house of the donor, then on requesting that vasha, say, "O Brahmins! This is havi for you. (48)