हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.4.49

कांड 12 → सूक्त 4 → मंत्र 49 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
दे॒वा व॒शां पर्य॑वद॒न्न नो॑ऽदा॒दिति॑ हीडि॒ताः । ए॒ताभि॑रृ॒ग्भिर्भे॒दं तस्मा॒द्वै स परा॑भवत् ॥ (४९)
क्रोधित देवताओं ने वशा से कहा कि इस यजमान ने हम को दान नहीं किया, यह दान न करने वाला इसी कारण पराजित होता है. (४९)
The angry gods told Vasha that this host did not donate to us, this one who does not donate is defeated for this reason. (49)