हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 12.9.5

कांड 12 → सूक्त 9 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 12)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
छि॒नत्त्य॑स्य पितृब॒न्धु परा॑ भावयति मातृब॒न्धु ॥ (५)
यह ब्राह्मण की गाय चुराने वाले के पिता के बांधवों का छेदन करती है और माता के बांधवों को अपमानित करती है. (५)
It pierces the brothers of the father of the brahmin's cow stealer and humiliates the brothers of the mother. (5)