हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
Home » Atharvaved » Kand 12 » Sukta 9 अथर्ववेद (कांड 12) तस्या॑ आ॒हन॑नं कृ॒त्या मे॒निरा॒शस॑नं वल॒ग ऊब॑ध्यम् ॥ (१)
ब्राह्मण की गाय को मारना मरणासन्न बन जाता है. इस को हनन करना कृत्या राक्षसी है. इस का गोबर युक्त आधा पका हुआ चारा शपथ के समान है. (१)
Killing a Brahmin's cow becomes dying. It is monstrous to violate it. Its half-cooked fodder containing cow dung is like an oath. (1)
अथर्ववेद (कांड 12) अ॑स्व॒गता॒ परि॑ह्णुता ॥ (२)
ब्राह्मण की अपहरण की गई गाय अपने वश में नहीं रहती है. (२)
The abducted cow of a Brahmin does not remain in its control. (2)
अथर्ववेद (कांड 12) अ॒ग्निः क्र॒व्याद्भू॒त्वा ब्र॑ह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यं प्र॒विश्या॑त्ति ॥ (३)
मारी हुई ब्राह्मण की गाय मांसाहारी पशु बन कर मारने वाले को खाती है. (३)
The killed Brahmin's cow becomes a non-vegetarian animal and eats the killer. (3)
अथर्ववेद (कांड 12) सर्वा॒स्याङ्गा॒ पर्वा॒ मूला॑नि वृश्चति ॥ (४)
यदि ब्राह्मण की गाय को कोई मारता है तो यह मारने वाले के शरीर के सभी जोड़ों को छिन्नभिन्न कर देती है. (४)
If someone kills a Brahmin's cow, it shatters all the joints of the killer's body. (4)
अथर्ववेद (कांड 12) छि॒नत्त्य॑स्य पितृब॒न्धु परा॑ भावयति मातृब॒न्धु ॥ (५)
यह ब्राह्मण की गाय चुराने वाले के पिता के बांधवों का छेदन करती है और माता के बांधवों को अपमानित करती है. (५)
It pierces the brothers of the father of the brahmin's cow stealer and humiliates the brothers of the mother. (5)
अथर्ववेद (कांड 12) वि॑वा॒हां ज्ञा॒तीन्त्सर्वा॒नपि॑ क्षापयति ब्रह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॑ क्ष॒त्रिये॒णापु॑नर्दीयमाना ॥ (६)
्षत्रिय द्वारा ब्राह्मण की गाय न लौटाई जाने पर उस के सभी बंधुओं को नष्ट कर देती है. (६)
If the Brahmin's cow is not returned by the Kshatriya, it destroys all his brothers. (6)
अथर्ववेद (कांड 12) अ॑वा॒स्तुमे॑न॒मस्व॑ग॒मप्र॑जसं करोत्यपरापर॒णो भ॑वति क्षी॒यते॑ ॥ (७)
ब्राह्मण की गाय को आगर क्षत्रिय न लौटाए तो वह क्षत्रिय को गृहहीन तथा संतानहीन कर देती है. ब्राह्मण की गाय चुराने वाला क्षत्रिय अपरा रोग से ग्रसित हो कर नष्ट हो जाता है. (७)
If the Agar Kshatriya does not return the Brahmin's cow, then it makes the Kshatriya homeless and childless. The Kshatriya who steals the Brahmin's cow is destroyed by suffering from apara disease. (7)
अथर्ववेद (कांड 12) य ए॒वं वि॒दुषो॑ ब्राह्म॒णस्य॑ क्ष॒त्रियो॒ गामा॑द॒त्ते ॥ (८)
ऊपर बताई गई दशा उस क्षत्रिय की होती है, जो विद्वान् की गौ का अपहरण करता है. (८)
The condition mentioned above is that of the Kshatriya, who kidnaps the scholar's cow. (8)