अथर्ववेद (कांड 13)
समि॑द्धो अ॒ग्निः स॑मिधा॒नो घृ॒तवृ॑द्धो घृ॒ताहु॑तः । अ॑भी॒षाड् वि॑श्वा॒षाड॒ग्निः स॒पत्ना॑न्हन्तु॒ ये मम॑ ॥ (२८)
ये अग्ने प्रदीप्त हो कर घृत से प्रबुद्ध हुए हैं. इस में घृत की आहुति दी गई है. अग्नि देव शन्रुओं को पराजित करने वाले हैं. अतः वे मेरे शत्रुओं का संहार करें. (२८)
These people have become illuminated and enlightened with ghee. In this, ghrit has been sacrificed. Agni Dev is going to defeat the shanrus. So let them kill my enemies. (28)