हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.1.35

कांड 13 → सूक्त 1 → मंत्र 35 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
ये दे॒वा रा॑ष्ट्र॒भृतो॒ऽभितो॒ यन्ति॒ सूर्य॑म् । तैष्टे॒ रोहि॑तः संविदा॒नो रा॒ष्ट्रं द॑धातु सुमन॒स्यमा॑नः ॥ (३५)
राष्ट्र का भरणपोषण करने वाले जो देवता सूर्य के चारों ओर घूमते हैं, रोहितदेव उन से समान मति रखते हुए तुम्हारे राष्ट्र को संतुष्ट करें. (३५)
May Rohitdev satisfy your nation by keeping equal mind with the gods who revolve around the sun, who sustain the nation. (35)