अथर्ववेद (कांड 13)
यो अ॒द्य दे॑व सूर्य॒ त्वां च॒ मां चा॑न्त॒राय॑ति । दुः॒ष्वप्न्यं॒ तस्मि॒ञ्छम॑लं दुरि॒तानि॑ च मृज्महे ॥ (५८)
हे सूर्य देव! हमारे और आप के मध्य जो बाधक होना चाहता है, उसे में पाप, दुःस्वप्न तथा दुष्कर्मो में स्थापित करता हूं. (५८)
O Sun God! I establish what wants to be a barrier between us and you in sin, nightmares and misdeeds. (58)