हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 13.1.60

कांड 13 → सूक्त 1 → मंत्र 60 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 13)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यो य॒ज्ञस्य॑ प्र॒साध॑न॒स्तन्तु॑र्दे॒वेष्वात॑तः । तमाहु॑तमशीमहि ॥ (६०)
जो यज्ञ देवताओं में अधिक विस्तृत है, हम उस यज्ञ की वृद्धि करने वाले बनें. (६०)
The yajna which is more elaborate among the gods, let us become the growth of that yajna. (60)